सोमवार, 15 अगस्त 2011

रघुवीर सहाय की कविता--- अधिनायक


राष्ट्रगीत में  भला कौन  वह 
भारत भाग्य विधाता है
फटा सुथन्ना पहने जिसका 
गुन हरचरना गाता है ।

मख़मल टमटम बल्लम तुरही 
पगड़ी छत्र चँवर के साथ 
तोप छुड़ाकर ढोल बजाकर
जय- जय कौन कराता है । 
 
पूरब-पच्छिम से आते हैं 
नंगे-बूचे नरकंकाल 
सिंहासन पर बैठा,उनके 
तमगे कौन लगाता है । 
 
कौन-कौन है वह जन-गण-मन- 
अधिनायक वह महाबली
डरा हुआ मन बेमन जिसका 
बाजा रोज़ बजाता है । 
             -
रघुवीर सहाय 

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